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'राहत' इन्दौरी
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झूठ को अपने मेरे सच के बराबर कर दे,
सामरी तू है, तो आजा मुझे पत्थर कर दे ।
तेरे हाथ में है तलवार, मेरे लब पे दुआ,
सूरमा, आ, मुझे मैदान के बाहर कर दे ।
सारे बादल हैं उसी के अगर वो चाहे तो,
मेरे तपते हुए सहरा को समन्दर कर दे ।
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'राहत' इन्दौरी
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झूठ को अपने मेरे सच के बराबर कर दे,
सामरी तू है, तो आजा मुझे पत्थर कर दे ।
तेरे हाथ में है तलवार, मेरे लब पे दुआ,
सूरमा, आ, मुझे मैदान के बाहर कर दे ।
सारे बादल हैं उसी के अगर वो चाहे तो,
मेरे तपते हुए सहरा को समन्दर कर दे ।
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